Wednesday, 26 January 2022
Republic day special
Tuesday, 25 January 2022
गणतंत्र दिवस पर विशेष : अपना कर्तव्य करें तभी देश बनेगा।
यही वह 26 जनवरी का गौरवशाली ऐतिहासिक दिन है जब भारत ने आज़ादी के लगभग 2 साल 11 महीने 18 दिनों के बाद इसी दिन हमारी संसद में भारतीय संविधान को पास किया था। ख़ुद को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करने के साथ ही भारत के लोगों द्वारा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। लेकिन आज भी हमारा गणतंत्र कितनी कंटीली झाड़ियों में फंसा प्रतीत होता है। अनायास ही हमारा ध्यान गणतंत्र की स्थापना से लेकर ” क्या पाया , क्या खोया ” के लेखा जोखा की तरफ खींचने लगता है। कर्तव्य पालन के प्रति सतत् जागरूकता से ही हम अपने अधिकारों को निरापद रखने वाले गणतंत्र का पर्व सार्थक रूप मे मना सकेंगे। तभी लोकतन्त्र और संविधान को बचाए रखने का हमारा संकल्प साकार होगा।
प्रायः कुछ लोगों से सुना जाता है कि स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी हमे देश से कुछ नहीं मिला जबकि यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में नागरिकों को बहुत सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन क्या लोग यह सोचते हैं कि उन्होने देश को क्या दिया ? यदि सभी लोग याचना छोड़ कर देश के प्रति अपने कर्तव्य निभाएं तो देश की उन्नति को कोई नहीं रोक सकता।
संविधान के रचियता दूरदृष्टी संपन्न थे। संविधान के पाठ में मूल अधिकारों में समावेश तो किया गया किन्तु नागरिकों के मूल कर्तव्य भी होने चाहिए, इसपर या तो किसी का ध्यान नहीं गया था या इसे आवश्यक नहीं समझा गया था। कदाचित उन्होंने सोचा था कि भारत के लोग और उन्हीं में से चुने गए उनके नेता भारतीय तो बने रहेंगे पर यह अवधारणा भ्रांत निकली। लगभग ढाई दशक के उपरांत 42वें संशोधन के माध्यम से सविधान में भाग 4 (क) , अनुच्छेद 51 क का समावेश करना ही पड़ा जिसमें स्वतंत्र भारत के नागरिकों के मूल कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है। अनुच्छेद 51क का स्वतंत्र देश के प्रत्येक नागरिक की आचार संहिता है।
आमतौर हम देश से अपेक्षाएं रखते हैं लेकिन खुद से कोई अपेक्षा नहीं रखते हैं ये जानते हुए भी हमसे ही बनता है देश। हम देश के लिए कुछ नही करते उसकी आर्थिक, सांस्कृतिक, समृद्धि में योगदान नही करते और देश से अपेक्षा करते हैं कि वह हमारे लिए करे। हमसे ही देश बनता है। हमारे कार्यों से देश प्रगति के रास्ते पर जाएगा।गणतंत्र दिवस के समय जरूर हमलोगों में देश के प्रति देश भक्ति उजागर होने लगती है। रेडियो, टेलीविजन में देशभक्ति के गाने हमें कुछ समय के लिए अपने कर्तव्यों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। परन्तु कुछ समय के बाद हमारा मन भी और चीज़ों में उलझ जाता है।
दरअसल व्यक्ति पांच स्तरों पर जीता है। आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा अद्ध्यात्मिक स्तरों पर। हर स्तर मे देश की एक प्रमुख भूमिका होती है। हम सब पर देश का उधार है। देश ने हमारी झोली में इतना कुछ दिया है फिर भी हम देश के सामने अपनी मांग ही रखते हैं। एक कहावत है जैसा आप सोचते हैं वैसा ही आप हो जाते हैं। आपकी सोच ही आपको बनाती हैं। हमें अपनी सोच को व्यापक बनाना होगा। छोटा सोचेंगे तो छोटा ही रह जाएंगे। हमारे मन में देने का भाव होना चाहिए न कि सिर्फ़ लेने का। देश को जब हम देते हैं उसी का प्रतिफल देश हमें देता है। सिर्फ़ कर देना देश सेवा नहीं होता।
आजादी की आधी से अधिक सदी बीतने के बाद भी हमारे कदम लड़खड़ा रहे हैं। सत्यमेव जयते से हमने किनारा कर लिया है। अच्छाई का स्थान बुराई ने ले लिया है और नैतिकता पर अनैतिकता प्रतिस्थापित हो गई है। ईमानदारी केवल कागजों में सिमट गई है और भ्रष्टाचार से पूरा समाज अच्छादित हो गया है। देश में भ्रष्टाचार, अराजकता, महंगाई, असहिष्णुता , बेरोजगारी और असमानता बढ़ता जा रहा है।
देशवासियों को जागने का समय आ गया है। भ्रष्टाचार और समाज को गलत राह पर ले जाने वाले लोगों को उनके गलत कार्यों की सजा देने के लिए आमजन को जागरूक होना जरूरी है। भावी पीढ़ी को संवारने के लिए पहले खुद को सुधारना होगा। गणतंत्र की साथर्कता तभी होगी जब हरेक व्यक्ति को काम और भरपेट भोजन मिले।
संविधान में जो हमारे कर्तव्य तय किए गए हैं उसका हम सही ढंग से पालन करें तभी हमारा देश महान बनेगा। संविधान का निर्माण इसलिए किया गया जिससे कानून व्यवस्था बनी रहे। सभी स्वतंत्र भारत में अमन और चैन से रह सके। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने संविधान में दिए गए नियमों का पालन करें। सबसे बड़ी बात अपने मौलिक अधिकारों को तो पहचाने ही साथ ही अपने मौलिक कर्तव्यों का भी निर्वहन करें।
देश भक्ति का भाव किसी अवसर का मोहताज नहीं होता। यह हमारे भीतर का स्थाई भाव होना चाहिए। देश भक्ति का मतलब देश से अपेक्षा नहीं , बल्कि देश के लिए कुछ करने की प्रवृति पैदा होना है।
Friday, 30 July 2021
महान लेखक मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उन्हे श्रद्धांजली
Wednesday, 28 July 2021
विश्व प्राकृति संरक्षण दिवस
Saturday, 24 July 2021
on the Occasion of Guru Purnima
Wednesday, 7 July 2021
एक दूजे के लिए
Sunday, 28 February 2021
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन
आज भारत के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का पुण्यतिथि है। हमारे यूवाओं को उनके बारे मे जानना ज़रूरी है।
उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ था। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी अपना योगदान दिया था। पूरे देश मे अत्यंत लोकप्रिय होने के कारण उन्हें राजेंद्र बाबू या देशरत्न कह कर पुकारा जाता था।
वह 1950 में संविधान सभा की अंतिम बैठक में राष्ट्रपति चुने गए और 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक देश के राष्ट्रपति रहे। राजेंद्र प्रसाद एक मात्र नेता रहे जिन्हें दो बार लगातार राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया। पेशे से वकील राजेंद्र बाबू महात्मा गांधी की प्रेरणा से वकालत छोड़ कर स्वतंत्रता संग्राम में उतरने का फैसला किया। भारत की आज़ादी की लड़ाई में उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। राजेंद्र बाबू को 1931 में सत्याग्रह आंदोलन और 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन के लिए महात्मा गांधी के साथ जेल भी जाना पड़ा था। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद 1934-1935 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सबसे बड़े पुरस्कार भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।
राजेंद्र बाबू अपने विद्यार्थी जीवन में काफी कुशाग्र बुद्धि वाला छात्र माने जाते थे। वह इतने बुद्धिमान थे कि एक बार परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिका की जांच करने वाले अध्यापक ने उनकी उत्तर पुस्तिका पर लिख दिया था कि " परीक्षा देने वाला परीक्षा लेने वाले से ज्यादा बेहतर है।" उन्होंने अपनी पढ़ाई के कारण गोपाल कृष्ण गोखले के द्वारा दिए गए " इंडियन सोसायटी " से जुड़ने का प्रस्ताव को ठुकरा दिया। राजेंद्र बाबू ने अलग अलग विषय में खुद को साबित किया था। अगर वह चाहते तो एक प्रशासनिक अधिकारी बन सकते थे। लेकिन उन्हें यह स्वीकार नहीं था। आज़ादी की कीमत उन्हें पता था इसलिए देश को मजबूत नींव देने के लिए वह राजनीति में आए। उनके जीवन से छात्रों को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। संघर्ष, मेहनत और कामयाबी की मिशाल है डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद। राजेंद्र बाबू ने राष्ट्र का मान बढ़ाने के साथ ही देशवासियों का
मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने जीवनकाल में देश की सेवा कर साबित किया कि राष्ट्र ही सर्वोपरि है। इससे बढ़ कर और कुछ भी नही। उन्होंने कहा था कि जो लोग सोचते हैं कि राजनीति अच्छे लोग या पढ़े लिखे लोगों के लिए नहीं है। यह पुरी तरह से गलत है। उनके जयंती समारोह को लोग राष्ट्रीय मेघा दिवस के रूप में मनाते हैं।
डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का जीवन सादगी एवं त्याग का प्रतीक था। राष्ट्रपति के पद पर रहने के बावजूद उनकी सादगी आज भी लोगों को प्रेरित करती है। राजेंद्र बाबू का कहना था कि दिखावट, फिजूलखर्ची अच्छे मनुष्य का लक्षण नहीं। वह चाहे कितना ही
बडा आदमी क्यों न हो। फिजूलखर्च करने वाला समाज का अपराधी है क्योंकि बढ़े हुए खर्चों की पूर्ति अनैतिक तरीके से नहीं तो और कहां से करेगा ? शायद उनकी
सादगी के कारण जवाहर लाल नेहरु और उनमें मतभेद थे। राजेंद्र बाबू और नेहरू के वैचारिक और व्यावहारिक मतभेद किसी से छुपा नहीं है। राजेन्द्र बाबू जहां हिन्दू परंपरावादी थे वहीं नेहरू आधुनिक और पश्चिम सोच वाले थे।
अप्रतिम प्रतिभा के धनी एवं सादा जीवन उच्च विचार के प्रतीक राजेंद्र बाबू देश वासियों के लिए सदा प्रेरणा श्रोत रहेंगे।
